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नाग करण

  • नाग करण
  • देवता : फनिन (सर्प)
  • समवर्ती नक्षत्र : अश्लेषा
  • संक्षेप में अभिप्राय :
  • अच्छी दृष्टि से सम्पन्न, सम्भवतः अप्रामाणिक ।
  • अत्यधिक शक्तिशाली।
  • प्रतिष्ठा युक्त, आदर योग्य, स्वतन्त्र, हमेशा के लिए प्रसिद्ध, अपनी जाति के मध्य प्रसिद्ध ।
  • विद्वान, खनिज और धातुओं के सम्बन्ध में विशेष ज्ञान होगा, खनिज पदार्थों के विज्ञान में ज्ञाता, सर्प बढ़ाना, मछलियाँ आदि पकड़ना, कार्य के प्रति लगाव |
  • अमीर, धनवान। - अपने पापों को समाप्त करना।
  • कोबरा (सर्प) की रक्षा करेगा (या जनन करेगा)।
  • शेखीबाज, क्रोधी, जल्दी संयम खो देने वाला।
  • अपनी घृणा को बढ़ाना, भयानक नौकरी करना ।
  • बृहत् संहिताः नाग में व्यक्ति को अचल वस्तुओं से सम्बन्धित कार्य, क्रूर कार्य बल के द्वारा साथ ही घृणित गतिविधियों को सम्भालता है।
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