- नाग करण
- देवता : फनिन (सर्प)
- समवर्ती नक्षत्र : अश्लेषा
- संक्षेप में अभिप्राय :
- अच्छी दृष्टि से सम्पन्न, सम्भवतः अप्रामाणिक ।
- अत्यधिक शक्तिशाली।
- प्रतिष्ठा युक्त, आदर योग्य, स्वतन्त्र, हमेशा के लिए प्रसिद्ध, अपनी जाति के मध्य प्रसिद्ध ।
- विद्वान, खनिज और धातुओं के सम्बन्ध में विशेष ज्ञान होगा, खनिज पदार्थों के विज्ञान में ज्ञाता, सर्प बढ़ाना, मछलियाँ आदि पकड़ना, कार्य के प्रति लगाव |
- अमीर, धनवान। - अपने पापों को समाप्त करना।
- कोबरा (सर्प) की रक्षा करेगा (या जनन करेगा)।
- शेखीबाज, क्रोधी, जल्दी संयम खो देने वाला।
- अपनी घृणा को बढ़ाना, भयानक नौकरी करना ।
- बृहत् संहिताः नाग में व्यक्ति को अचल वस्तुओं से सम्बन्धित कार्य, क्रूर कार्य बल के द्वारा साथ ही घृणित गतिविधियों को सम्भालता है।
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दिव्य त्रिकाल ज्योतिष केंद्र
Divya Trikal Jyotish Kendra
जन्म कुंडली • हस्त रेखा • वास्तु • पूजा/अनुष्ठान
Janm Kundali • Hast Rekha • Vastu • Pooja/Anushthan
॥ ॐ गणेशाय नमः ॥
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Kumud Ranjan Mishra
Astrologer & Vastu Expert
सिद्ध माता मंदिर, दुकान संख्या 2 के सामने, गेट नंबर 1 के पास, सरोजिनी नगर मार्केट, नई दिल्ली 110023
Sidh Mata Mandir, Opp. Shop No.2, Near Gate No.1, Sarojini Nagar Market, New Delhi 110023
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