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चतुष्पाद करण

  • चतुष्पाद करण
  • देवता : वृष
  • समवर्ती नक्षत्र : रोहिणी संक्षेप में अभिप्राय :
  • दीर्घायु ।
  • अधिक बोलने वाला। शक्तिशाली, प्रसिद्ध, शक्तिशाली, अति सज्जन ।
  • सक्रिय, परिश्रमी (साथ ही : परिश्रमी नहीं), बुद्धिमान होगा, ज्ञानयुक्त, सभी व्यापार का जानकार, खेती करने और व्यापार करने में अंतर्ग्रस्त होना, कृषि में रुचि, धर्म ग्रंथों का। ज्ञाता, भगवान और धर्मपरायण लोगों को पसन्द करना, एक श्रेष्ठ योगी।
  • धनवान |
  • अस्थिर, बहुजन दुर्भाग्य होंगे।
  • धोखेबाज, क्रूर, बुरे अभिप्राय वाला, चित्त में कई चीजों से पीड़ित, दूसरी स्त्रियों के पीछे जाना।
  • बृहत् संहिताः चतुष्पाद में व्यक्ति को मवेशियों, ब्राह्मणों और देशों (राजनीतिक मामलों) से सम्बन्धित कार्य करने चाहिए।

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