- दशम भाव के नाम : सर्वार्थ चिन्तामणिः आज्ञा (आदेश), मान (सम्मान), दशम (दसवाँ), कर्म (कार्य), अस्पद (स्थिति), खम (गगन)। फल दीपिकाः व्यापार (वाणिज्य), अस्पद (स्थान या पद), मान (सम्मान), कर्म (कार्य), जय (जीत), सत् (उत्तम), कीर्ति (यश), क्रतु (त्याग), जीवन (जीविका या व्यवसाय), व्योम (आकाश या गगन), आचर (सदाचरण), गुण (उत्तमता), प्रवृत्ति (चित्तवृत्ति), गमन (गत्), अज्न (आदेश) एवं मेघूरण। जातक पारिजातः व्यापार व्यवसाय), मेघूरण, मध्य (गगन), मान (सम्मान), ज्ञान (बोध), राजस्पद (साम्राज्य), मध्य एवं व्यापार।। जातक अलंकार : पिता, आदेश, मान, व्यवसाय, स्थान या पद, गगन (आकाश), नभ, व्योम (मध्य स्वर्ग), मेघूरण एवं कर्म (काम)। होरा सारः कर्म (जीविका), अस्पद (स्थान), अज्न (आदेश), मेघूरण एवं खमध्य (दृढ़ता की पराकाष्ठा)।
- दशम भाव चार भावों में से एक है जो केन्द्र, कंटक या चतुष्ट्य भी कहलाते हैं। यह उत्तम भावों में से एक है जो जातक के लिए मंगलकारी होगा। यह उपचय कहलाने वाले चार भावों में से एक भाव है।
- दशम भाव के महत्त्व : दशम भाव के भाव कारक बृहस्पति, सूर्य, बुध एवं शनि हैं। पराशरः राजसत्ता (प्रभुत्व), स्थान, व्यवसाय, जीविका, सम्मान, पिता, विदेशी भूमि पर रहना, ऋण। उत्तर कालामृतः व्यापार, संप्रभुता से सम्मानित, अश्वारोहण, व्यायाम, सरकारी कार्य, सेवा, कृषि, चिकित्सक, यश, खजाने को जमा करना, त्याग, पूर्व-श्रेष्ठता, वृद्ध, तिलिस्म, ताबीज मंत्र, मातृ, नैतिक गुणों की विशालता, औषधि, जंघा, प्रभु, मंत्रों की गुण सम्पन्नता, समृद्धि, दत्तक पुत्र, स्वामी, पथ, सम्मान, सम्मानजनक जीवन, एक राजकुमार, यश, निर्देश हेतु आशय।। सर्वार्थ चिन्तामणिः गगन द्वारा मार्गदशन, वर्षा, किसी के पिता के कर्म एवं उसके स्थान, आदर, गुण, देश, शक्ति, प्रभुत्व, गाय, पद से पतन (पद-अवनति, पद से मुक्त होना आदि)। होरा सारः किसी का व्यवसाय, जीवन, साहस, शूरता, विद्या एवं यश (प्रसिद्ध)।
Acharya R. K. Mishra is a Leader in Astrology Know more..
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